Pages

Tuesday, January 15, 2013

गुरुत्तर :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल

गुरुत्तर

गुरुत्तर भार भरैसँ पहि‍ने
गुरुत्तर पाठ पठैत पढ़ै छी।
सड़ि‍-सड़ि‍ सरि‍या-सरि‍या
सि‍र साटि‍ सजबए लगै छै।
बून-बून बुन्नी पकड़ि‍-पकड़ि‍
धड़ि‍-धड़ि‍ धारण करै छै।
धड़कि‍-धड़कि‍ धड़-धड़धड़ा
गति‍ गीत मीत गबै छै।
शि‍वगंगा पकड़ैसँ पहि‍ने
पथर-माटि‍ बनए लगै छै।
परि‍हास रचि‍-बसि‍ कैलाश
राति‍ शि‍व रचबए लगै छै।
एक-एक जोड़ि‍-जाड़ि‍ पजेबा
महल ताज सजबए लगै छै।
पकड़ि‍ बाँहि‍ अक्षर ब्रह्म
वन-उपवन सजबए लगै छै।
अक्षर-ब्रह्म मि‍लि‍ बैसि‍
शक्‍ति‍ शब्‍द सजबए लगै छै।

हि‍त-सहि‍त पकड़ि‍-पकड़ि‍

मुँह साहि‍त्‍य सि‍रजए लगै छै।

Thursday, December 27, 2012

समाज सजल :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


समाज सजल......

समाज सजल छै छि‍पाड़-उकट्ठी
छीप-उकठपना बेवसाय बनल छै।
रंग-बि‍रंग समाज गढ़ि‍-मढ़ि‍
रंग-रंग छीप कटैत रहै छै।
भाय यौ, रंग-रंग......।
आस-वि‍यास बनि‍ते जहि‍ना
चोर-माखन कृष्‍ण कहै छै।
गोप-गोपी बीच उमकि‍
कहि‍ उमकि‍ उकठपन कहै छै।
भाय यौ, कहि‍ उमकि‍......।
भावो लोक तहि‍ना भवए
मारि‍ सेन्‍ह काटि‍ कहै छै।

शास्‍त्री, शब्‍दशास्‍त्री कहि‍

कर्ता-धर्ता ब्रह्म कहै छै।

मीत यौ, कर्ता......।

Wednesday, December 19, 2012

अनचिन्हार आखर

माँझ आंगनमे कतिआएल छी

हम पुछैत छी

निश्तुकी

रथक चक्का उलटि चलै बाट

हमरा बिनु जगत सुन्ना छै

वर्णित रस

क्षणप्रभा

कलानिधि

नव अंशु

मोनक बात