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Tuesday, August 28, 2012

धड़मक फूल :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


धड़मक फूल......

धड़मक फूल फुलेबे करै छै
बनि‍ फुलबाड़ी सजबे करै छै।
धाम-काम बनबे करै छै।
भीड़-कुभीड़ बीच बीचमानि‍
स्‍वर शंख उठबे करै छै।
शंख स्‍वर उठबे करै छै।
धड़मक फूल......।
धड़ अनेको धड़-चालि‍ अनेको
रूप कृष्‍ण कहबे करै छै।
बानि‍ पकड़ि‍ बीअनि‍ बदलि‍
साँस-हवा भरबे करै छै।
धड़मक फूल......।
नाओं हजरि‍या रचि‍-रचि‍ बसि‍

राति‍-दि‍न जपि‍ते रहै छै।

कुरू-पाण्‍डु बीच बसि‍ कृष्‍ण

नाद-शंख भरबे करै छै।

धड़मक फूल......।

कि‍छु ने करै छी :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


कि‍छु ने करै छी......

कि‍छु ने करै छी, मीत यौ
कि‍छु ने करै छी।

गेड़ू-चौक मारि‍ गनगुआरि‍ बनि‍

दि‍न-राति‍ रमल रहै छी।

मीत यौ कि‍छु ने करै छी।

जरि‍-मरि‍ गेल मन-कामना

समए संगम संग रमल छी

मीत यौ कि‍छु ने करै छी।

बोनक बाट आगू छै

उत्तरे-दछि‍ने धार बहल छै

घटि‍-घटि‍ घटि‍या घाट बनि‍

घोंटे-घोट पीबैत रहै छी

मीत यौ कि‍छु ने करै छी

ससरि‍-ससरि‍ ससरति‍ रहै छी

गाछ उतरि‍ धरती पकड़ि‍

लछमी-नाग कहबैत रहै छी

मीत यौ कि‍छु ने करै छी।

वि‍षय दस :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


वि‍षय दस......

वि‍षय दस ि‍सलेबस प्रवेश
दसो दि‍शा देखैत रहै छै।
त्रि‍भूज-ज्‍यमि‍ति‍ तहि‍ना
गीत व्‍यास गबैत रहै छै।
वि‍षय दस......।
सून अप्‍पन हि‍स्‍सा कहि‍-कहि‍
ठेहुन रोपि‍ अड़ल रहै छै।
अंकसँ हि‍साबो तहि‍ना
रथ जि‍नगी धि‍चैत चलै छै।
रथ जि‍नगी......।
आगू भलहि‍ं काटि‍-छाँटि‍

घटबी घाट बढ़ैत चलै छै।

होइत-हबाइत धकि‍या-धुकि‍या

हि‍स्‍सा अपन कहबैत चलै छै।

हि‍स्‍सा अपन.....।

आश प्रेम संग :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


आश प्रेम संग......

आश प्रेम संग झूि‍म रहल छै
लाल टमाटर बाजि‍ रहल छै।
आश प्रेम......।
वन बीच सन्‍यासी जहि‍ना
झींक दऽ दऽ जात नचबै छै।
नि‍आस कहाँ छोड़ि‍ संग
चि‍क्कस बनि‍-बनि‍ भूमि‍ भरै छै।
आश प्रेम......।
लाल टमाटर बनि‍ सन्‍यासी
खटमीठ रूप धड़ैत रहै छै।
नै मीठ तँ खट्टो नहि‍येँ
अपन नाओं सुनबैत कहै छै।
आश प्रेम......।
गीत गीता गाबि‍ सन्‍यासी
भगवत भजन करैत रहै छै।
सबूर पाबि‍ सबर सबरी
मरि‍तो राम एबे करै छै।

आश प्रेम संग......।

मीत यौ, देहक पानि‍ :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


मीत यौ, देहक पानि‍.......

मीत यौ, देहक पानि‍ तखन फुलाइ छै
कोढ़ी बनि‍ काज रूप लगै छै।
देहक पानि‍ तखन फुलाइ छै।
कोढ़ि‍ये ने फुलो-फड़ो संग
बाँहि‍ पकड़ि‍ संकल्‍प कुदै छै।
देहक पानि‍.....।
जाधरि‍ मन संकल्‍पि‍त नहि‍
ताबे केना उद्देश्‍य कहबै छै
संकल्‍पे ने तन-मन बीच
सीमा दइत डेग बढ़बै छै।
मीत यौ, देहक पानि‍.....।
काम-धाम जहि‍ना बनै छै

तहि‍ना ने कर्मो-धर्म कहबै छै

धर्मे ने धारण करैत

पथ-पानि‍ चढ़बैत चलै छै।

मीत यौ, देहक पानि.....।

जाल समाज :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


जाल समाज......

जाल समाज महजाल बनल छै
हाना बनि‍ परि‍वार सजल छै।
जाल समाज महजाल बनल छै।
बि‍नु नाप हाना बनल छै
हाना मध्‍य खाना सजल छै।
हाना बूझि‍ खाना लपकि‍
खानामे जा-जा फँसै छै।
मीत यौ, जाल समाज.....।
जान गमाएब खेल खेलि‍

बचैक नहि‍ उपाए करै छै

ऊपर कूदि‍-कूदि‍ फानि‍ चाहि‍

गोरि‍या-गोरि‍या गुहारि‍ करै छै।

मीत यौ, जाल समाज.....।

कोढ़ पकड़ि‍ :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


कोढ़ पकड़ि‍......

कोढ़ पकड़ि‍ कोढ़ी कहै छै
कोंढ़ि‍या कोढ़ पकड़ने छै।

केना कऽ फड़बै-फुलेबै
रेहे-देहे पकड़ने छै।
कोढ़ पकड़ि‍.....।
देखबोमे नहि‍ देख पड़ै छै
सुनबोमे नहि‍ सुनि‍ पबै छै।
टीश-पीड़ा टीशा पीड़ा
घोर-घोर मन बनौने छै।
कोढ़ पकड़ि‍.....।
नहि‍ कहि‍यो फड़बै-फुलेबै

झखि‍-झखि‍ आशा तोड़ने छै।

सकारथ भऽ अकारथ बनि‍-बनि‍

दि‍न-राति‍ अनि‍याय करै छै।

कोढ़ पकड़ि‍.....।

दीनक दि‍न केना :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


दीनक दि‍न केना......

दीनक दि‍न केना कऽ चढ़तै
मन कहाँ कहि‍यो मानै छै।
रतुके काजे दि‍नो काटि‍-खोंटि‍
बढ़ती कहाँ तानि‍ पबै छै।
दीनक दि‍न केना.....।
बि‍नु तनने घोकचि‍-मोकचि‍
जाड़ माघ अबैत रहै छै।
चैतक चेत चेतौनी चेति‍
सि‍र जेठ धड़ैत रहै छै।
दीनक दि‍न केना.....।
तीन जेठ एगारहम माघ

तीनू लोक देखैत सुनै छै।

देह-पसेना सुरकि‍ चाटि‍

माघे ने माघो कहबै छै।

दीनक ि‍दन केना.....।

सुखले मे सभ :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


सुखले मे सभ......

सुखले मे सभ पि‍छड़ि‍ रहल छै
मुँह-कान सभ तोड़ि‍ रहल छै।
सूखल जानि‍ पएर जतऽ रोपै छै
काह-कूह सभ ततऽ जमल छै।
सुखले मे सभ.....।
सूखल धरती जतए पड़ल छै
झल-फल नजरि‍ ततए जाइ छै।
सुखले मे सभ......।
अन्‍हर-जाल फरि‍च्‍छ मानि‍ बूझि‍

भोर-भुरुकबा सूर्य बुझै छै।

सुखले मे सभ......।

भूत बनि‍ भुति‍आएल :: जगदीश प्रसाद मण्डल


भूत बनि‍ भुति‍आएल......


भूत बनि‍ भुति‍आएल छी
मि‍त यौ बनि भूत भुति‍आएल छी।
संगे-संग जगलौं
संगे-संग उठलौं
संगे-संग चालि‍ चलि‍
संगे हेराएल छी।
संगि‍या मरि‍ गेल
हम भुति‍आएल छी।

केकरा कहबै भूत भवि‍ष्‍य
वर्त्तमान छि‍ड़ि‍आएल छै।

रग्गर बि‍च फक्कर बनि‍

लाजे-पड़ाएल छै

लाजे पड़ाएल छै।

भूत बनि‍ भुति‍आएल छै

बनि‍ भूत भुति‍अाएल छै।

गुमकीमे बौआए :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


गुमकीमे बौआए......

गुमकीमे बौआए रहल छी
औल-बौल टौआए रहल छी।
गुमकीमे..........।
कखनो अन्‍हर-बि‍हारि‍ देखै छी
झाँट-पानि‍ बि‍च पड़ए लगै छी।
गुमकीमे............।
घाम-पसि‍ना बहि‍ रहल छै

आश-ि‍नराश चलि‍ रहल छै।

धक्कम-धुक्कम चलि‍ रहल छै

औलाइत-बौलाइत मन कहै छै।

गुमकीमे..........।

बैसले-बैसल नाचि :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


गीत-

बैसले-बैसल नाचि‍ रहल छै
गुड़-चाउर मन फाँकि‍ रहल छै।
सि‍सकैत-सि‍हरैत कतौ देखि‍
संग मि‍लि‍ कऽ कानि‍ रहल छै
बैसले-बैसल.......।
उफनैत-उधि‍याइत धार देखि‍

संग मि‍लि‍ कऽ दाबि‍ रहल छै।

घट-घट घाट बना-बना

धार-वि‍चार बहा रहल छै।

बैसले-बैसल.........।

झोंक जुआनी झोंकए :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


गीत- 

झोंक जुआनी झोंकए लगै छै
उष्‍मा पाबि‍ उमसए लगै छै।
झोंक जुआनी.......।
जाधरि‍ सि‍र सृजै शि‍शि‍र छै
हार-मासु सि‍हरैत रहै छै।
सुनि‍ते कोकि‍ल कुहुकि‍ वसंती
भनभनाइत मन तनतनाए लगै छै।
झोंक जुआनी.........।

रंग-वि‍रंगक वन-उपवनमे

रंग-रंगक फूल खि‍लए लगै छै

पाबि‍ रस मधुमाछी सि‍रजए

कोनो बि‍ख चुभकैत रहै छै।

झोंक जुआनी.......।

मुँहक हँसी केहेन :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप देखैत चलू।
छाती केना दलकि‍ रहल छै
सूर-तान भजैत चलू।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।
जि‍नगी जेकर जेहेन रहै छै
छाती तेहने तेकर बनै छै।
हलसि‍-कलशि‍ कहैत रहै छै
पारदर्शी एेना बनैत रहै छै।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।

जखने पालि‍स शीशा लगतै
झल अन्‍हार बनि‍ते रहतै।
झल अन्‍हार अन्‍हार बदलि‍
एक्कभग्‍गु बनि‍ शीशा कहतै।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।

देखि‍-देखि‍, सुनि‍-सुनि
‍‍हँसैत डेग उठबैत चलू।

मुँहक हँसी केहेन अबै छै

ठोरक रूप.......।

गाछक रंग बदलि :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


गीत- 

गाछक रंग बदलि‍ रहल छै
मौसम संग सुधरि‍ रहल छै।
थल-कमल जकाँ कहि‍यो
गाढ़-लाल-उज्‍जर बनै छै।
तहि‍ना फूल-फल कोढ़ि‍ जकाँ
झरि-झरि‍ कोनो फलो बनै छै‍।
गाछक रंग बदलि‍ रहल छै
मौसम संग.......।
आशा आश लगा-लगा
जीत अपराजि‍त बनैत रहै छै।
सुधरि‍ रूप बदलि‍ चालि‍
कारी काजर चमकि‍ उठै छै।
गाछक रंग बदलि‍ रहल छै
मौसम संग.......।

लत्ती पानि‍ रूप बदलि‍
थल-कमल कहबैत चलै छै
तहि‍ना लत्ती अपराजि‍त
गाछ बनि‍ गछाड़ि‍ धड़ै छै।
गाछक रंग बदलि‍ रहल छै

मौसम संग.......।